Nov 03, 2009

उल्लेखनीय है कि दो माह पूर्व दैनिक जागरण द्वारा अनाथ बच्चों के आश्रय का सवाल उठाये जाने के बाद यहां के प्रशासन ने समाज कल्याण निदेशालय द्वारा गठित जिला बाल कल्याण समिति की सुध ली थी। बाल कल्याण समिति को जब जिला प्रशासन से भरोसा मिला तो समिति ने अनाथ बच्चों के लिये काम कर रही सामाजिक संस्था मिराकल फाउण्डेशन को अपने संरक्षण में ले लिया। समिति के सक्रिय होने के बाद अब अनाथ बच्चों को सहारा मिला है। समिति अध्यक्ष तेजबल शुभम ने बताया कि उनके पास लाये जाने वाले अनाथ बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ी है। संस्था चाहती है कि इन बच्चों को अच्छे मां-बाप मिलें। इन्हें गोद लेने के लिये नि:संतान लोग आगे आएं ताकि सुयोग्य लोगों का चयन करके उन्हें वैधानिक रूप से बच्चे गोद दिये जा सकें। श्री शुभम ने बताया कि जिले में अनाथ बच्चों की संख्या 3 सौ से भी ज्यादा है। इन्हें समिति द्वारा चिह्नित किया गया है तथा आंगनबाड़ी एवं सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से इनको सहारा देने का प्रयास चल रहा है। अनाथ बच्चों की तेजी से बढ़ रही संख्या के बारे पड़ताल करने पर यह बात सामने आयी कि प्रेम संबंधों की परिणति विवाह तक नहीं पहुंच पाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत सी किशोरियां बिन ब्याही मां बन जाती हैं। इसके बाद अधिकांश मामलों में नवजात बच्चे खो देते हैं ममता की छांव।
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